दिल्ली के युवा खिलाड़ियों को ग्रासरूट लेवल पर हर महीने 2,000 रुपए का

नई दिल्ली, 10 सितंबर । मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने और युवा खिलाड़ियों को हर महीने 2,000 रुपए का प्रोत्साहन देकर उन्हें प्रतियोगिता के उच्च स्तर तक पहुंचने में मदद करने का फ़ैसला किया है।

एक सरकारी बयान के अनुसार, गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली सरकार ने 'मुख्यमंत्री खेल प्रोत्साहन योजना' (एमकेपीवाई) के तहत 'ग्रासरूट ट्रेनिंग सपोर्ट असिस्टेंस' (शुरुआती स्तर पर प्रशिक्षण सहायता) शुरू करने को मंजूरी दी।

इस नई पहल के तहत, दिल्ली सरकार के स्पोर्ट्स सेंटरों और स्टेडियमों में नियमित रूप से ट्रेनिंग लेने वाले योग्य युवा खिलाड़ियों को हर महीने 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलेगी।

इसका मकसद उन आर्थिक बाधाओं को दूर करना है जो ट्रेनिंग में रुकावट डाल सकती हैं और यह पक्का करना है कि युवा खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही लगातार ट्रेनिंग मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सहायता योजना 'मुख्यमंत्री खेल प्रोत्साहन योजना' की पहुंच को जमीनी स्तर तक बढ़ाती है।

"शुरुआती सालों में, खिलाड़ियों को अक्सर खान-पान, लोकल यात्रा, खेल के ज़रूरी सामान और मेडिकल ज़रूरतों पर नियमित खर्च करना पड़ता है। 2,000 रुपये की मासिक सहायता उन्हें बिना किसी रुकावट के अपनी ट्रेनिंग जारी रखने में मदद करेगी। इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के ट्रेनिंग छोड़ने की संभावना कम होगी और दिल्ली सरकार के स्पोर्ट्स सेंटर और स्टेडियम ज़मीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने के मज़बूत केंद्र के तौर पर विकसित हो सकेंगे।"

नई व्यवस्था के तहत, हर सरकारी स्पोर्ट्स सेंटर या स्टेडियम में नियमित रूप से एनरोल किए गए ट्रेनीज़ में से 25 प्रतिशत तक को सहायता दी जाएगी।

आमतौर पर, किसी एक स्टेडियम या सेंटर में ज़्यादा से ज़्यादा 100 खिलाड़ियों को इसमें शामिल किया जाएगा। ज़्यादा ट्रेनीज़ वाले बड़े स्टेडियमों में, बजट की उपलब्धता के आधार पर यह सीमा 150 खिलाड़ियों तक बढ़ाई जा सकती है।

इस योजना में अंडर-14, अंडर-17, अंडर-19 और अंडर-21 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल होंगे। लाभार्थियों का चयन खेल में प्रदर्शन और क्षमता, नियमित उपस्थिति और अनुशासन, और आर्थिक ज़रूरत के आधार पर किया जाएगा। योग्य खिलाड़ियों को तय शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें नियमित एनरोलमेंट और कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों के चयन के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया होगी, जिसमें हर तिमाही उनके प्रदर्शन, उपस्थिति और अनुशासन की समीक्षा की जाएगी।

इससे यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि सहायता उन युवा खिलाड़ियों तक पहुँचे जो नियमित रूप से ट्रेनिंग ले रहे हैं और जिनमें खेल में आगे बढ़ने की क्षमता है।

यह नई पहल 'मुख्यमंत्री खेल प्रोत्साहन योजना' के मौजूदा ढांचे का और विस्तार करती है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मौजूदा 'ट्रेनिंग सपोर्ट मॉड्यूल' के तहत, स्कूल लेवल पर टॉप रैंक वाले एथलीटों को कोचिंग, इक्विपमेंट, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने, न्यूट्रिशन और ट्रेनिंग से जुड़ी दूसरी ज़रूरतों के लिए हर साल 5 लाख रुपये तक की मदद दी जाती है।

दिल्ली और भारत का सबसे ऊंचे लेवल पर प्रतिनिधित्व करने वाले बेहतरीन एथलीटों को हर साल 20 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है।

'पार्टिसिपेशन सपोर्ट' के तहत, मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से जुड़े ज़रूरी खर्चों के लिए हर एथलीट को 2 लाख रुपये तक की रकम वापस (रीइम्बर्स) की जाती है।

Source: IANS

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