पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार

नई दिल्ली, 13 अप्रैल। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के खिलाफ असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज उस आपराधिक केस से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भूइयां सरमा के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयान देने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, असम सरकार ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर (डायरी नंबर 22236/2026 के तहत) दर्ज है और फिलहाल ‘पेंडिंग’ स्थिति में है।

इस याचिका को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत के समक्ष उल्लेखित किया गया, जहां बुधवार को इसकी त्वरित सुनवाई की मांग की गई है।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देते हुए यह राहत दी थी, ताकि वे असम की सक्षम अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। न्यायमूर्ति के. सुजना की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में खेड़ा को एक सप्ताह के लिए अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने रिंकी भूइयां सरमा के खिलाफ मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए।

सुनवाई के दौरान, खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह एफआईआर राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है और असम के मुख्यमंत्री व उनके परिवार पर सवाल उठाने के कारण कांग्रेस नेता को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोप, यदि गलत भी माने जाएं, तो अधिकतम मानहानि का मामला बनता है और गिरफ्तारी उचित नहीं है।

वहीं, असम के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि तेलंगाना हाईकोर्ट में यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं और असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस कारण नहीं है।

असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। यह मामला तब दर्ज हुआ जब खेड़ा ने आरोप लगाया कि रिंकी भूइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, दुबई में अघोषित लग्जरी संपत्तियां और अमेरिका में शेल कंपनियां हैं।

इस विवाद ने असम विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। कांग्रेस ने खेड़ा का समर्थन करते हुए आरोप लगाया है कि हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि आपराधिक कार्रवाई करने के बजाय मुख्यमंत्री और उनके परिवार को लगाए गए आरोपों का जवाब देना चाहिए।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement