आईपैक छापेमारी मामला: ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर आज

नई दिल्ली, 22 मई । सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को आईपैक मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा। ईडी की मांग है कि ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं।

ईडी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस साल की शुरुआत में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (आईपैक) के कोलकाता स्थित दफ्तर में तलाशी अभियान के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दखलअंदाजी की थी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया था।

यह मामला 8 जनवरी को ईडी की ओर से आईपैक के दफ्तर और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकाने पर तलाशी अभियानों से जुड़ा है। ये तलाशी अभियान कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में किए गए थे।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी, पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, आईपैक के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर में तब घुस गईं, जब वहां तलाशी चल रही थी और उन्होंने जांच में बाधा डाली। ईडी ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान उसके अधिकारियों को रोका गया और डराया-धमकाया गया।

पिछली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की ओर से चल रही जांच के बीच में कथित रूप से दखलअंदाजी करना लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है। जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने मौखिक रूप से कहा था, "यह अपने आप में राज्य और केंद्र के बीच का कोई विवाद नहीं है। यह अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति की ओर से किया गया कृत्य है, जो संयोग से एक राज्य का मुख्यमंत्री है और जो पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है।"

अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने बाधा डालने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि परिसर में उनकी सीमित मौजूदगी सिर्फ तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा गोपनीय और मालिकाना डेटा वापस लेने के लिए थी। हलफनामे के मुताबिक, उन्हें यह जानकारी मिलने के बाद वह परिसर में गई थीं कि तलाशी के दौरान 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति से जुड़ा संवेदनशील राजनीतिक डेटा देखा जा रहा था।

हलफनामे में आगे दावा किया गया कि ईडी अधिकारियों ने कुछ डिवाइस और दस्तावेज वापस लेने की अनुमति दी थी और उसके बाद तलाशी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से जारी रही।

Source: IANS

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