मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 11 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क

पणजी, 27 मई । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने गोवा के अरपोरा में 'बिर्च' नाम के प्रतिष्ठान के अवैध संचालन से जुड़ी चल रही जांच के सिलसिले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत 11.01 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

ईडी ने गोवा पुलिस (अंजुना पुलिस स्टेशन और मापुसा पुलिस स्टेशन) द्वारा सौरभ लूथरा और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। ये एफआईआर न केवल 6 दिसंबर 2025 को हुई भीषण आग की घटना से संबंधित हैं, जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे, बल्कि दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े अपराधों से भी संबंधित हैं, जिनमें नियामक मंजूरी प्राप्त करने के लिए उपयोग किए गए नकली और मनगढ़ंत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य वैधानिक दस्तावेज शामिल हैं।

पीएमएलए के तहत जांच से पता चला कि इस प्रतिष्ठान का संचालन एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा एलएलपी द्वारा बिना अनिवार्य वैधानिक मंजूरी, जिसमें फायर एनओसी भी शामिल है, प्राप्त किए किया जा रहा था। प्रतिष्ठान के भागीदारों ने कथित तौर पर लाइसेंस प्राप्त करने और इस अवैध प्रतिष्ठान को वैध दिखाने के लिए नकली और मनगढ़ंत दस्तावेज, जिनमें एक नकली स्वास्थ्य एनओसी और जाली पुलिस क्लीयरेंस प्रमाण पत्र शामिल हैं, जमा किए थे।

जांच ​​में आगे पता चला कि भागीदारों ने एक-दूसरे के साथ मिलीभगत करके, अनिवार्य लाइसेंसों की अनुपस्थिति और उनकी समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जानबूझकर व्यावसायिक संचालन जारी रखा। प्रतिष्ठान का व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया था और उसका नवीनीकरण नहीं किया गया था। फिर भी, प्रतिष्ठान उसके बाद भी संचालित होता रहा।

जांच में आगे यह भी पता चला कि प्रतिष्ठान ने वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 (6 दिसंबर 2025 तक) की अवधि के दौरान लगभग 29.78 करोड़ रुपए का कुल राजस्व अर्जित किया, जिसे पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 'अपराध से अर्जित आय' के रूप में पहचाना गया है।

इससे पहले, जांच के दौरान, 23 जनवरी 2026 को संबंधित संस्था से जुड़े विभिन्न परिसरों पर तलाशी ली गई थी, जिसके परिणामस्वरूप आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, तथा लगभग 59 लाख रुपए की राशि वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। इससे पहले, इस मामले में लगभग 17.45 करोड़ रुपए का एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किया गया था। ताजा अटैचमेंट और फ्रीजिंग के साथ, इस मामले में अब कुल अटैचमेंट/फ्रीजिंग लगभग 29.05 करोड़ रुपए हो गई है।

Source: IANS

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