'पैरीमैच' पर ईडी का शिकंजा, 17 ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति हुई जब्त

मुंबई, 27 मई । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गैर-कानूनी ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म ‘पैरीमैच’ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में 17 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत हुई। यह प्लेटफॉर्म ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन जुटाने और उसे अलग-अलग चैनलों के माध्यम से छिपाने में शामिल था।

ईडी ने बताया कि छापों के दौरान लगभग 1.56 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जब्त की गई, जिसमें करीब 1.2 करोड़ रुपये नकद शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में जमा लगभग 3.8 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी गई। जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

यह कार्रवाई मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। 'पैरीमैच' पर ऑनलाइन बेटिंग ऑपरेशन के जरिए लोगों को निवेश पर अधिक रिटर्न का लालच देकर फंसाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म ने एक वर्ष के भीतर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की हो सकती है।

जांच में सामने आया कि प्लेटफॉर्म और उससे जुड़े नेटवर्क ने म्यूल अकाउंट्स, भुगतान मध्यस्थों और फिनटेक चैनलों का इस्तेमाल कर यूजर्स का पैसा इकट्ठा किया और उसे कई स्तरों पर घुमाकर मनी ट्रेल को छिपाने की कोशिश की। कई मामलों में यूजर के विड्रॉल सीधे प्लेटफॉर्म के अकाउंट से नहीं किए गए, बल्कि दूसरे यूजर्स के डिपॉजिट को कई हिस्सों में ट्रांसफर कर भुगतान किया गया, ताकि असली स्रोत का पता न चल सके।

ईडी के मुताबिक, यूजर डिपॉजिट और विड्रॉल के लिए जिन खातों का इस्तेमाल किया गया, वे सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी और फिनटेक कंपनियों के नाम पर खोले गए थे। इन खातों का उपयोग कथित तौर पर बिजनेस ट्रांजैक्शन और पेमेंट गेटवे सर्विस के नाम पर धन को इधर-उधर भेजने के लिए किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंट, ग्राहक सेवा केंद्र, कैश मैनेजमेंट सर्विस, स्थानीय किराना दुकानों और रिटेल आउटलेट्स का भी कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, यूजर्स के फंड पहले रिटेलर को ट्रांसफर किए जाते थे, फिर बीसी एजेंटों के जरिए उन्हें अलग-अलग वॉलेट में भेजा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पैसे के असली स्रोत को छिपाना था।

ईडी ने यह भी दावा किया कि कुछ एजेंट सीएमएस चैनलों से प्राप्त नकदी को हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजते थे। ‘पैरीमैच’ ने पैरीमैच स्पोर्ट्स और पैरीमैच न्यूज जैसे नामों से सरोगेट विज्ञापन चलाकर अपने प्लेटफॉर्म का व्यापक प्रचार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने कॉमर्स ऐप्स के जरिए भी प्रचार सामग्री वितरित की, ताकि नए यूजर्स को आकर्षित किया जा सके।

Source: IANS

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