1.3 लाख करोड़ की फ्रेट कॉरिडोर परियोजना राष्ट्र को समर्पित,

उरण (महाराष्ट्र), 8 सितंबर । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को जेएनपीटी-न्यू उमरगाम खंड वाले वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के उद्घाटन को एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर भारत में माल ढुलाई व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा और कम लागत वाली वैश्विक लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भारत को चीन का मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना की मदद से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 10 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत तक आ जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 1.3 लाख करोड़ रुपए की इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग 1,500 किलोमीटर लंबे इस फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में है। यह परियोजना उत्तर भारत को देश के पश्चिमी तट से बेहतर तरीके से जोड़ेगी।

फडणवीस ने कहा कि 2014 से पहले भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 14 प्रतिशत थी, जबकि चीन में यह करीब 7 प्रतिशत थी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत ने इस लागत को घटाकर 10 प्रतिशत तक पहुंचाया है। अब (डब्लयूडीएफसी) के पूरी तरह चालू होने के बाद यह लागत 7 प्रतिशत तक आने की संभावना है। इससे भारत वैश्विक विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनेगा तथा बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी देश के कुल कंटेनर ट्रैफिक का 55 प्रतिशत से अधिक संभालती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में जेएनपीटी की क्षमता कई मिलियन टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) से अधिक हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित वधावन पोर्ट, जो जेएनपीटी से तीन गुना बड़ा होगा और डब्लयूडीएफसी मिलकर महाराष्ट्र को समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बड़ी ताकत बना देंगे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कॉरिडोर की लगभग 70 से 80 प्रतिशत क्षमता उत्तर भारत के इनलैंड कंटेनर डिपो और पश्चिमी बंदरगाहों जैसे जेएनपीटी, मुंद्रा और पीपावाव के बीच आयात-निर्यात कंटेनर यातायात के लिए निर्धारित की गई है।

इस कॉरिडोर के माध्यम से उर्वरक, खाद्यान्न, नमक, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद , सीमेंट और अन्य औद्योगिक सामानों की ढुलाई की जाएगी। यह दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रमुख लॉजिस्टिक्स आधार के रूप में काम करेगा और इसके मार्ग पर मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क तथा औद्योगिक केंद्रों के विकास को बढ़ावा देगा।

इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी का प्रमुख वित्तीय सहयोग प्राप्त है।

Source: IANS

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