महिला सशक्तिकरण में भारत की बैंकिंग योजना की अहम भूमिका : यूएन

संयुक्त राष्ट्र, 5 मार्च । महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले एक संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने भारत की 29 करोड़ से अधिक महिलाओं को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने वाली योजना की सराहना की है। साथ ही, इसे महिलाओं और लड़कियों के लिए एक परिवर्तनकारी मार्ग के वैश्विक मॉडल के रूप में उजागर किया है। 

महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र महिला की नीति निदेशक सैंड्रा हेंड्रिक्स ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संपूर्ण महिला व बालिका आबादी (जो विश्व की कुल महिला व बालिका आबादी का पांचवां हिस्सा है) के लिए डिजिटल पहचान को सक्षम बनाना वास्तव में एक अनुकरणीय कदम है।

उन्होंने अगले सप्ताह होने वाले आयोग की 70वीं वार्षिक बैठक से पहले यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पूरे भारत में महिलाओं व बालिकाओं के लिए डिजिटल बैंक खाता खोलने की अनिवार्यता को कम करना भी एक अनुकरणीय कदम है।

उन्होंने कहा, "डिजिटल वित्तीय समावेशन महिलाओं व बालिकाओं के लिए एक अत्यंत आवश्यक और परिवर्तनकारी मार्ग है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) ने महिलाओं को बैंकिंग सेवाएं प्रदान की हैं। इस कार्यक्रम के तहत खोले गए खातों में से 56 प्रतिशत खाते अब महिलाओं के पास हैं।

यह सार्वभौमिक बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली, आधार के कारण संभव हुआ है।

हेंड्रिक्स ने कहा कि पीएमजेडीवाई महिलाओं व लड़कियों के लिए विधायी परिवर्तन की शक्ति और क्षमता को दर्शाता है। जब कानून महिलाओं व लड़कियों को आगे बढ़ने में मदद करते हैं, यानी बैंक खाता खोलने और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने में, तभी जीवन में वास्तविक बदलाव आता है।

महिला आयोग की बैठक से पहले महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की महिलाओं की स्थिति पर जारी रिपोर्ट में सभी महिलाओं व लड़कियों के लिए न्याय तक पहुंच पर जोर दिया गया था।

वैश्विक स्तर पर महिलाओं को पुरुषों के कानूनी अधिकारों का केवल 64 प्रतिशत ही प्राप्त है क्योंकि कई देशों में भेदभावपूर्ण कानूनी ढांचा अब भी कायम है।

इसमें कहा गया है कि प्रगति संभव है लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए महिलाओं व लड़कियों के लिए ठोस और सहभागी न्याय परिणामों तक पहुंच पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।

यह गैर-भेदभाव और समानता के मौलिक मानवाधिकारों पर आधारित हो और व्यवस्थागत बहिष्कार व सत्ता की विषमताओं को समझना भी आवश्यक है।

Source: IANS

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