नाइजीरिया में स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में हैजा का प्रकोप, बोर्नी राज्य में 200 लोगों की मौत

वाशिंगटन, 23 जुलाई । स्वच्छ पानी और पर्याप्त सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नाइजीरिया के पूर्वोत्तर राज्य बोर्नी में पिछले दो महीनों में हैजा के प्रकोप में लगभग 200 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मानवीय संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स-एमएसएफ भी कहते हैं) ने दी है।

बुधवार को स्थानीय समयानुसार जारी एक बयान में एमएसएफ ने बीमारी के बढ़ते प्रकोप पर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि चल रहे राहत प्रयासों के बावजूद यह बीमारी स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी पड़ सकती है। एमएसएफ ने बोर्नी राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 12 जुलाई तक राज्य में कम से कम 198 लोगों की मौत हो चुकी थी और 35,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए थे।

संगठन ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों और मानवीय सहायता भागीदारों के साथ मिलकर काम करते हुए उसने 12 जुलाई तक हैजा के संदिग्ध 24,000 से अधिक रोगियों का इलाज किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, संगठन ने प्रभावित समुदायों में स्वच्छ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्त उपलब्धता को बीमारी के लगातार फैलने का कारण बताया।

अप्रैल में नाइजीरिया के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने भारी बारिश और बाढ़ से जुड़े हैजा के प्रकोप के खतरे को देखते हुए 10 राज्यों को उच्च सतर्कता पर रखा था। नाइजीरियाई सरकार ने अपनी आपदा प्रबंधन प्रणाली को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों को तैनात कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस महामारी से निपटने में सहयोग दिया है।

बोर्नी राज्य सरकार के सचिव बुकर तिज्जानी ने कहा कि राज्य ने आपातकालीन उपाय लागू किए हैं, जिनमें स्थानीय बांधों और जलाशयों जैसे जल स्रोतों तक पहुंच को प्रतिबंधित करना और टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति का विस्तार करना शामिल है, जबकि प्रकोप के स्रोत की जांच जारी है।

दूषित भोजन या पानी से होने वाली दस्त की बीमारी नाइजीरिया विशेष रूप से बाढ़ से प्रभावित राज्यों और खराब जल और स्वच्छता अवसंरचना वाले राज्यों में प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।

Source: IANS

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