अमेरिका के 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को दुश्मन मानेगा ईरान: मोहसिन

तेहरान, 23 अगस्त । ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक लड़ाई में शामिल होगा, उसे तेहरान अपना 'दुश्मन' मानेगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव रेजाई ने शनिवार को सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि ईरान पहले ऐसे देशों से बातचीत करेगा और उनसे इस विवाद से दूर रहने की अपील करेगा। लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते, तो ईरान उनके हितों को निशाना बनाएगा। रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर आसपास के देश अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक घेराव में शामिल होते हैं, तो ईरान 'हॉर्मुज स्‍ट्रेट से तेल भी निर्यात नहीं होने देगा।'

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले कई वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने और तेल बेचते रहने के तरीके सीख लिए हैं।

रेजाई ने दोहराया कि हॉर्मुज स्‍ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून में हुए ईरान-अमेरिका शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि इस बार पहला कदम वॉशिंगटन को ही उठाना होगा।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक अभियान भी उसकी पहले की दबाव बनाने वाली नीतियों की तरह नाकाम रहेगा।

राघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, "14 साल पहले: 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध' नाकाम रहे। आठ साल पहले: 'अधिकतम दबाव' नाकाम रहा। पांच महीने पहले: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' नाकाम रहा। आज: 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' यह भी नाकाम रहेगा।"

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।"

उन्होंने इस कदम को 'इकोनॉमिक डी-डे' भी बताया।

18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को सभी मोर्चों पर समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लेबनान से जुड़ा मामला भी शामिल था। इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह अवधि सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं है।

Source: IANS

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