पर्सनल लोन की है तैयारी? बाजार की पाठशाला में जानें सरकारी और प्राइवेट बैंकों की सबसे सस्ती ब्याज दरें
किसी आकस्मिक बड़े खर्च, चिकित्सा आपातकाल, विवाह, सफर अथवा किसी अन्य वित्तीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रायः पर्सनल लोन को सबसे सुलभ जरिया माना जाता है। मगर, ऋण लेते वक्त महज इस बात पर ध्यान देना काफी नहीं है कि बैंक आपको कितनी धनराशि स्वीकृत कर रहा है।

नई दिल्ली, 6 सितंबर । किसी आकस्मिक बड़े खर्च, चिकित्सा आपातकाल, विवाह, सफर अथवा किसी अन्य वित्तीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रायः पर्सनल लोन को सबसे सुलभ जरिया माना जाता है। मगर, ऋण लेते वक्त महज इस बात पर ध्यान देना काफी नहीं है कि बैंक आपको कितनी धनराशि स्वीकृत कर रहा है। आपकी कुल देनदारी पर ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क, ऋण चुकाने की समयावधि और प्री-पेमेंट की शर्तों जैसे अनेक कारकों का सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि सितंबर 2026 में अलग-अलग बैंकों द्वारा दी जा रही पर्सनल लोन की ब्याज दरों की आपस में तुलना करना अत्यंत जरूरी हो जाता है।
वर्तमान में मौजूद ब्याज दरों को देखें तो निजी क्षेत्र के बैंकों के अंतर्गत एक्सिस बैंक सालाना न्यूनतम 8.75 फीसदी की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन दे रहा है। इसके पश्चात, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक दोनों की ही शुरुआती ब्याज दर 9.99 प्रतिशत निर्धारित है। दूसरी तरफ, कोटक महिंद्रा बैंक की शुरुआती ब्याज दर 10.99 फीसदी है, जबकि इंडसइंड बैंक में यह शुरुआती दर 12 प्रतिशत से आरंभ होती है।
इस आधार पर देखा जाए तो कम शुरुआती ब्याज दर के मामले में एक्सिस बैंक फिलहाल निजी क्षेत्र के बैंकों में सबसे प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में उभरता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सबसे कम 9.05 प्रतिशत सालाना की शुरुआती ब्याज दर ऑफर कर रहा है। इसके बाद केनरा बैंक की दर 9.70 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की 10 प्रतिशत, बैंक ऑफ बड़ौदा की 10.15 प्रतिशत, पंजाब नेशनल बैंक की 10.25 प्रतिशत और बैंक ऑफ इंडिया की 10.85 प्रतिशत है।
इस प्रकार सरकारी बैंकों के बीच यूनियन बैंक और केनरा बैंक सबसे आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश करते दिखाई देते हैं।
हालांकि बैंक द्वारा घोषित शुरुआती ब्याज दर को अंतिम दर नहीं माना जा सकता। वास्तविकता में प्रत्येक ग्राहक को उसके वित्तीय प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश की जाती है।
बैंक लोन मंजूर करने से पहले आवेदक का सिबिल स्कोर, मासिक आय, नौकरी की स्थिरता, पहले से चल रहे ऋण, ईएमआई दायित्व और पुनर्भुगतान इतिहास (रीपेमेंट हिस्ट्री) का मूल्यांकन करते हैं। यदि किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर मजबूत है और आय स्थिर है, तो उसे कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना अधिक होती है। वहीं कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल या अधिक मौजूदा कर्ज होने पर बैंक अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दर लगा सकते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि लोन चुनते समय केवल ब्याज दरों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कई बार बैंक कम ब्याज दर दिखाते हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क अधिक होने के कारण कुल लागत बढ़ जाती है।
इसलिए किसी भी पर्सनल लोन को अंतिम रूप देने से पहले ब्याज दर के साथ-साथ प्रोसेसिंग शुल्क, डॉक्यूमेंटेशन फीस और अन्य लागू शुल्कों की भी तुलना करनी चाहिए।
कई लोग कम मासिक ईएमआई के लिए लंबी अवधि का लोन चुन लेते हैं। इससे मासिक भुगतान का बोझ कम हो जाता है, लेकिन लंबे समय में कुल चुकाया जाने वाला ब्याज काफी बढ़ सकता है।
इस कारण वित्तीय सलाहकार हमेशा सुझाव देते हैं कि उधारकर्ता अपनी आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए ऐसी अवधि चुनें, जिससे ईएमआई भी संतुलित रहे और कुल ब्याज का बोझ भी अधिक न बढ़े।
यदि भविष्य में लोन को समय से पहले चुकाने की योजना है, तो बैंक की प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। कई बैंक समयपूर्व भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं, जिससे आपकी बचत कम हो सकती है। इसलिए लोन लेने से पहले सभी नियमों और शर्तों को समझना बेहद जरूरी है।
Source: IANS

