बिजनेस - पेज 29
भारत का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स (जिन्हें अभी बनाया जा रहा है) पर पूंजीगत खर्च जून, 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह केंद्र सरकार द्वारा बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित किए गए 40.54 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश का 54 प्रतिशत से अधिक है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ फ्लैट खुला। इस दौरान बेंचमार्क सूचकांक, निफ्टी50 और सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में एक बड़ी ताकत बनने के लिए तैयार है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित होगी।।
रूस ऐसा रेलवे ट्रैक बनाने की संभावना तलाश रहा है, जो भविष्य में उसे हिंद महासागर तक जमीनी पहुंच प्रदान कर सके और भारत से जोड़ सके। रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने यह जानकारी दी है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। अमेरिका-ईरान तनाव, पहली तिमाही के नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से बाजार की चाल तय होगी।
भारत की शीर्ष 10 में से चार कंपनियों का मार्केटकैप 1.43 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया है। इसमें सबसे अधिक फायदा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को हुआ है।
वर्तमान समय में, जब दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को भी प्रभावित किया है, जिसके चलते आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है और देश-दुनिया में तेल एवं गैस की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिला है, तो ऐसे माहौल में सरकार समर्थित बचत योजनाएं (सेविग स्कीम्स) देश के परिवारों के लिए वित्तीय नियोजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई हैं। इन योजनाओं में अपेक्षाकृत कम जोखिम, निर्धारित ब्याज दर, अनुमानित रिटर्न और कर संबंधी लाभ मिलते हैं।
केंद्र सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच शनिवार को स्पष्ट किया कि यूपीआई से भुगतान करने वाले आम नागरिकों से किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।
अमेरिका लंबे समय से ये दावे करता रहा है कि पूरे विश्व में लाखों लोगों की जान लेने वाला।
कमोडिटी बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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