गोवा की महिला से 2.6 करोड़ रुपए की साइबर ठगी, ईडी ने आरटीजीएस एजेंट को किया गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा की एक महिला की डिजिटल गिरफ्तारी और उससे 2.6 करोड़ की उगाही में शामिल होने के आरोप में एक आरटीजीएस एजेंट को गिरफ्तार किया है।
पणजी, 19 अक्टूबर । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा की एक महिला की डिजिटल गिरफ्तारी और उससे 2.6 करोड़ की उगाही में शामिल होने के आरोप में एक आरटीजीएस एजेंट को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में एक अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी।
ईडी अधिकारी ने एक बयान में कहा कि मुकेश कुमार पुखराज जैन उर्फ मुकेश भाई को ईडी, पणजी जोनल कार्यालय ने 16 अक्टूबर को गोवा निवासी की डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
बयान में कहा गया है कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद गोवा की एक विशेष अदालत (पीएमएलए) ने मुकेश कुमार पुखराज जैन को सोमवार तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। बयान में यह भी कहा गया है कि वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला छठा आरोपी है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि साइबर अपराध गिरोह के कुछ ठिकानों पर ईडी की तलाशी के बाद आरोपी जैन ने उन रिकॉर्ड और मोबाइल हैंडसेट को नष्ट कर दिया जिनमें इस कारोबार से जुड़े सबूत थे।
वह बयान देने के लिए तय तारीख पर पेश नहीं हुआ और जब वह ईडी के सामने पेश हुआ तो उसने टालमटोल भरे जवाब दिए। ईडी ने बताया कि उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच शुरू की गई थी।
ईडी ने बताया कि पीड़िता को वीडियो कॉल पर रखा गया, उसे यह विश्वास दिलाया गया कि उसके खिलाफ आपराधिक जांच चल रही है और उसे जबरन करीब 2.6 करोड़ रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
ईडी की जांच में पता चला कि जबरन वसूली गई रकम साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को बैंक ट्रांसफर के जरिए प्राप्त करने, उसे नगद में बदलने और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करने के लिए स्थापित कंपनियों के एक नेटवर्क में पहुंची।
ईडी ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े खातों के बारे में 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक पीड़ित शिकायतें और 160 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें लगभग 417 करोड़ का नुकसान हुआ है।
ईडी ने बताया कि आरोपी जैन नेटवर्क के लिए आरटीजीएस एजेंट के रूप में काम करते हुए नेटवर्क के खातों में बैंक क्रेडिट की व्यवस्था करता था और बदले में नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले व्यक्तियों से कमीशन लेकर नगद राशि प्राप्त करता था।
ईडी ने बताया कि पीएमएलए, 2002 के तहत अपने बयानों में उसने स्वीकार किया कि वह जानता था कि इस शृंखला में शामिल धन साइबर धोखाधड़ी से आया था।
Source: IANS