सिर्फ पुरुषों को ही नहीं, महिलाओं को भी हो सकता है दिल की बीमारी का खतरा; अनदेखा न करें ये संकेत
दिल की बीमारियाँ आज दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पहले इन्हें अधिकतर पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं में भी इसका जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
नई दिल्ली, 1 मई । दिल की बीमारियाँ आज दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पहले इन्हें अधिकतर पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं में भी इसका जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि कई महिलाएँ अपने जोखिम को लेकर पर्याप्त रूप से जागरूक नहीं हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में हृदय रोगों की पहचान अक्सर पुरुषों की तुलना में देर से होती है। इसका कारण यह है कि महिलाओं में लक्षण कई बार अलग और अपेक्षाकृत हल्के होते हैं, जिन्हें सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नतीजतन, सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता और जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
चिकित्सा शोध में यह भी सामने आया है कि हृदय रोगों पर किए गए कई अध्ययन मुख्य रूप से पुरुषों पर आधारित रहे हैं। इसी वजह से पारंपरिक लक्षण जैसे तेज सीने में दर्द को अधिक महत्व दिया गया, जबकि महिलाओं में यह लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। महिलाओं में सांस फूलना, अत्यधिक थकान, मतली, या पीठ, गर्दन और जबड़े में दर्द जैसे संकेत अधिक देखने को मिल सकते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि पुरुषों और महिलाओं के हृदय में कुछ जैविक अंतर हो सकते हैं, जिन पर अभी भी शोध जारी है। यही कारण है कि हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का निदान और उपचार हमेशा प्रभावी नहीं हो सकता।
अच्छी बात यह है कि अधिकतर हृदय रोगों से बचाव संभव है, क्योंकि इनका संबंध जीवनशैली से गहराई से जुड़ा होता है। संतुलित आहार—जैसे फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज—हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जबकि अत्यधिक नमक, चीनी और तले-भुने भोजन से बचना जरूरी है।
नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और तनाव पर नियंत्रण भी हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। खासकर लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर और दिल दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
कुछ विशेष स्थितियाँ, जैसे गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ या ऑटोइम्यून बीमारियाँ, भी महिलाओं में जोखिम बढ़ा सकती हैं, लेकिन इन पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
इसीलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से शुरुआती चरण में ही समस्या का पता लगाया जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाएँ अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
Source: IANS