धमकियों के बीच वार्ता संभव नहीं, अमेरिका करे समझौते का सम्मान: अराघची

तेहरान, 7 जुलाई । मध्य-पूर्व एशिया में फिलहाल शांति है, लेकिन यूएस-ईरान के बीच हाल ही में हुआ समझौता कितने दिन तक कायम रहेगा, इसे लेकर असमंजस बरकरार है। इसकी एक अहम वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फिर ईरान की ओर से दिए जा रहे जवाब माने जा रहे हैं। सोमवार को भी ट्रंप ने ऐसा ही कुछ कहा, जिसका जवाब ईरान की ओर से आया। ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अबास अराघची ने स्पष्ट किया कि धमकियों से काम नहीं चलेगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि यदि धमकियों का सिलसिला जारी रहा, तो अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू नहीं होगी। उन्होंने इस संबंध में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के पैराग्राफ 13 का हवाला दिया।

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा,"लाखों गौरवान्वित ईरानी" सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एकत्र हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "न तो ईरानी जनता और न ही हमारी बहादुर सशस्त्र सेनाएं किसी भी तरह की धमकियों से प्रभावित होंगी। अपने हस्ताक्षर का सम्मान करें।"

अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ समझौता करेगा या फिर "काम तमाम करेगा"।

ट्रंप के मुताबिक या तो डील होगी या ईरान का काम तमाम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक उन्हें ईरान के साथ फिर जंग नहीं चाहिए; वे सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैं तो ईरान के साथ डील करना चाहूंगा; मैं नहीं चाहता कि 91 मिलियन लोगों की जिंदगी प्रभावित हो। हम अगर चाहें तो एक घंटे में इनके ब्रिज उड़ा सकते हैं। हम इनकी एनर्जी सप्लाई ध्वस्त कर देंगे। इनके पास कभी बहुत पैसा होता था, लेकिन अब कुछ नहीं है। हमने इन्हें एक पैसा नहीं दिया है।"

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कुछ सवालों के जवाब देते हुए अपनी राय रखी।

Source: IANS

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