हेल्थ एंड फिटनेस - पेज 15
किडनी की बीमारी और डायलिसिस की स्थिति में खानपान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर से कई ऐसे मिनरल्स बाहर नहीं निकल पाते जो सामान्य रूप से यूरिन के जरिए निकल जाते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को लंबे समय से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण माना जाता रहा है। डॉक्टर हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना जरूरी है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है।
वर्षा ऋतु का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इसी समय शरीर के अंदर कई बदलाव भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पाचन शक्ति, यानी जठराग्नि, थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए जो भी हम खाते-पीते हैं उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
5 से 12 साल की उम्र बच्चों के शरीर और दिमाग के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसी समय बच्चे तेजी से बढ़ते हैं, उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं, मांसपेशियां विकसित होती हैं, और दिमाग सीखने की क्षमता को तेजी से बढ़ाता है।
आज के समय में स्मार्टफोन हर उम्र के लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। खासकर बुजुर्गों के लिए यह तकनीक अपने परिवार और दुनिया से जुड़े रहने का एक आसान जरिया है, लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा या आदत के तौर पर किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर उल्टा असर भी डाल सकता है।
चकोतरा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में साइट्रस मैक्सिमा कहा जाता है, खट्टे फलों की श्रेणी में सबसे बड़ा और खास फल माना जाता है। इसे अंग्रेजी में पोमेलो भी कहते हैं।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक चिंताएं और लगातार बदलती जीवनशैली लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। ऐसे माहौल में बहुत से लोग कुछ समय अकेले बिताना पसंद करते हैं।
महिलाओं व युवतियों के पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले चेहरे पर अचानक पिंपल्स निकलना परेशानी की वजह बन जाती है। अक्सर ऐसा होता है कि त्वचा ठीक लग रही होती है लेकिन अचानक चेहरे पर दाने उभर आते हैं।
आजकल बच्चों में सिर्फ "पिकी ईटिंग", यानी चुन-चुनकर खाना खाने की आदत ही नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति भी देखने को मिल रही है, जिसे एआरएफआईडी (अवायडेंट रेस्ट्रिक्टिव फ़ूड इनटेक डिसऑर्डर) कहा जाता है। स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में इस बीमारी के इलाज को लेकर बड़ी सफलता मिली है।
आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चे को सबसे बेहतर देखना चाहते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब माता-पिता अपनी इन उम्मीदों को बच्चों पर थोपने लगते हैं और उन्हें 'परफेक्ट' बनने के लिए मजबूर करते हैं। इसे साइकोलॉजिकल भाषा में 'पुशी पेरेंटिंग' कहा जाता है।
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