हेल्थ एंड फिटनेस - पेज 14
टाइप-2 डायबिटीज की चपेट में आने का जोखिम सिर्फ शरीर के बढ़े हुए वजन या मोटापे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मांसपेशियों की सेहत भी एक बेहद अहम भूमिका निभाती है। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी की अगुवाई में हुए एक नए शोध से यह सामने आया है कि जिन लोगों में शरीर की अतिरिक्त चर्बी के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होती हैं, उनमें इस बीमारी का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
मुंह में होने वाले छाले छोटे जरूर होते हैं लेकिन इनकी वजह से होने वाली परेशानी काफी ज्यादा हो सकती है। ये खाने, बोलने और पानी पीने में भी दर्द पैदा करते हैं।
कॉफी पीना पसंद करने वालों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से कॉफी पीने वाले लोगों में गंभीर लिवर बीमारी का खतरा कम होता है।
वर्तमान समय में हर व्यक्ति अपने बालों को सुंदर और आकर्षक लुक देना चाहता है। चाहे किसी विशेष अवसर पर जाना हो अथवा दैनिक रूप को बदलना हो, लोग तरह-तरह के हेयरस्टाइल अपना रहे हैं।
सामान्य सिरदर्द की तुलना में माइग्रेन का दर्द काफी भिन्न होता है, जिसमें सिर के किसी एक हिस्से में होने वाली तीव्र पीड़ा कई घंटों तक बनी रह सकती है। यद्यपि इस बीमारी के उपचार के लिए मुख्य रूप से दवाओं का सहारा लिया जाता है, परंतु वैज्ञानिक शोधों के अनुसार कुछ प्राकृतिक तरीकों से भी इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।
खाने-पीने की आदतों का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि दही, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों की सेहत को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं और इनका सेवन कोलोरेक्टल कैंसर (आंत और मलाशय का कैंसर) के खतरे को कम कर सकता है।
आज के समय में मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आंखों में थकान, जलन, सूखापन और रोशनी से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (एमएफडीए) ने तीन कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल के खिलाफ सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। लैब टेस्ट में इनमें मरकरी और लेड की खतरनाक रूप से ज्यादा मात्रा पाई गई, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
अल्जाइमर बीमारी को आमतौर पर लोग भूलने की समस्या के तौर पर जानते हैं। जब किसी को नाम याद न रहे, चीजें रखकर भूल जाए या जगहों को पहचानने में दिक्कत हो, तब अक्सर कहा जाता है कि यह अल्जाइमर का असर हो सकता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने में खुलासा हुआ है कि दिमाग में बदलाव सिर्फ याददाश्त कमजोर होने के बाद ही नहीं, बल्कि उससे कई साल पहले भी शुरू हो सकते हैं।
आजकल लोग अपने घरों और कार्यालयों को हरा-भरा और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के इनडोर पौधे लगाते हैं। इन्हीं में से एक है स्नेक प्लांट (संसेविएरिया), जो अपनी खूबसूरत लंबी पत्तियों के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी कई लाभों के लिए भी जाना जाता है।
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