हेल्थ एंड फिटनेस - पेज 13
वर्तमान समय में खाद्य पदार्थों को लंबी अवधि तक सुरक्षित और ताजा बनाए रखने में फूड पैकेजिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूध, फल, सब्जियां, स्नैक्स अथवा तैयार भोजन जैसी तमाम चीजों को ऐसी पैकेजिंग की आवश्यकता होती है, जो उन्हें हवा और नमी से बचाकर उनकी गुणवत्ता को बनाए रखे।
वशिष्ठासन योगासन एक ऐसा शक्तिशाली आसन है, जो शारीरिक शक्ति और मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है। यह एक साइड-प्लैंक अभ्यास नहीं है बल्कि अपनी सीमाओं को चुनौती देकर आंतरिक संतुलन पाने का मार्ग है।
अगर आपको सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में घुटनों में दर्द होता है, लंबे समय तक बैठने के बाद उठने में परेशानी होती है या घुटनों में जकड़न महसूस होती है, तो आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयुष मंत्रालय ने एक आसान 'नी मूवमेंट' साझा किया है, जिसे नियमित रूप से करने से घुटनों की सेहत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
बारिश के मौसम में स्वस्थ और सुरक्षित रहने के लिए जरूरी हेल्थ टिप्स, मच्छरों से बचाव, वायरल संक्रमण से सुरक्षा, खान-पान, स्वच्छता, यात्रा के दौरान सावधानियां और मानसून में अपनाए जाने वाले महत्वपूर्ण उपाय जानें।
जब भी चीनी (शुगर) की बात होती है, तो सबसे पहले मिठाई, केक, चॉकलेट, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक का ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीनी सिर्फ मीठी चीजों में ही नहीं होती? कई ऐसे पैक्ड और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ हैं, जिनका स्वाद मीठा भी नहीं लगता, फिर भी उनमें अच्छी-खासी मात्रा में ऐडेड शुगर होता है।
अक्सर लोग चीनी से बचने के लिए डाइट ड्रिंक, शुगर-फ्री मिठाइयों या कम कैलोरी वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, लेकिन अब यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के वैज्ञानिकों की एक स्टडी बताती है कि ये स्वीटनर्स हमारी आंतों में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया पर असर डाल सकते हैं।
आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द, कंधों की जकड़न और मानसिक तनाव एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में आकर्ण धनुरासन एक अचूक और प्रभावी योगासन की तरह काम करता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारी कई आदतें बदल गई हैं। घंटों तक ऑफिस में बैठकर काम करना, लगातार मोबाइल चलाना और कम चलना-फिरना आम हो गया है।
बहुत से लोग दिमाग को तेज रखने और याददाश्त बेहतर करने के लिए फिश ऑयल कैप्सूल लेते हैं। इसकी वजह है इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, खासकर डीएचए जिसे दिमाग की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है।
प्रेग्नेंसी के नौ महीनों में महिला के शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, बल्कि चेहरे और त्वचा पर भी दिखाई देता है।
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