जेपीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच हो, झारखंड सरकार असली दोषियों को बचा रही: बाबूलाल मरांडी

रांची, 26 जुलाई । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोला है।

रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित घोटाला है और राज्य सरकार सीआईडी जांच के जरिए असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका आरोप था कि सरकार जानबूझकर ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करती है, जिनपर पहले से सवाल उठते रहे हैं। इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की जा रही है। उनके अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तक के लिए अभ्यर्थियों से अलग-अलग स्तर पर पैसे लिए जाते हैं। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए मरांडी ने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि ख्यांग्ते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी भूमिका की भी जांच की जाए। उनका आरोप था कि सरकार सीआईडी जांच के माध्यम से सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में भी सीआईडी जांच से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया था। भाजपा नेता ने दावा किया कि जनवरी में कर्नाटक के एक छात्र ने तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी और परीक्षा से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा पैसे वसूले जाने की शिकायत की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मरांडी ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। उनका आरोप था कि प्राथमिकी सामान्य धाराओं में दर्ज की गई है, जिससे आरोपियों को कानूनी लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिकी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच करने की अपील करते हुए कहा कि जांच किसी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनकी जांच की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि यदि सरकार की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है तो पूरे जेपीएससी विवाद की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो राज्य के युवा आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

Source: IANS

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