हेल्थ एंड फिटनेस - पेज 54
आयुर्वेद में खाने से लेकर निरोगी जीवन जीने के कई नियम बताए गए हैं। आयुर्वेद मनुष्य के शरीर की प्रवृत्ति के हिसाब से आहार और जीवनशैली का चयन करता है।
मार्च और अप्रैल का महीना बीमारियों वाला होता है। इस वक्त मौसम तेजी से बदलता है और सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर किसी के पास किचन में खड़े होकर खाना बनाने का समय या सुविधा नहीं होती।
आज के समय शारीरिक दिनचर्या से ज्यादा लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इस आदत की वजह से लोग कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं।
बदलते मौसम का प्रभाव शरीर पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अगर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत नहीं है, तो शरीर कई बीमारियों का शिकार हो जाता है।
गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मौसम में चिपचिपापन भी शुरू हो जाता है, जो बालों और स्किन को बुरी तरीके से प्रभावित करता है।
अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ या आस्था से जोड़कर देखते हैं, लेकिन अगर आयुर्वेद की नजर से समझें तो यह शरीर को अंदर से रीसेट करने का एक बेहतरीन मौका होता है।
गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधि के कम होने के कारण आज के समय में पेट से जुड़े विकार सबसे ज्यादा परेशान करते हैं।
Tulsi को नवरात्र में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इसे चढ़ाने से भगवती प्रसन्न होती हैं। औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है।
स्वर्ण आभा बिखेरता अमलतास 'गोल्डन शावर ट्री' न केवल अपनी लटकते सुनहरे पुष्पों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी औषधीय संपदा के लिए भी पहचाना जाता है।
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